प्यार का इजहार

अरमां हमारे कम नहीं
इरादों में भी दम कम नहीं
रोज सोंचते हैं आज तो कर देंगे
उनसे प्यार का इजहार पर
उनके सामने जाने की हिम्मत नहीं
खिड़की से देखकर खिड़की
बंद कर लेती हूँ
वो भी हमारे प्यार में पागल
कम नहीं
गर हो गई किसी और से शादी तो
इस जहान में रहेगे हम नहीं
मर जाएगे और रोज आएगे सताने
किसी सौतन को उनके पास
आने देगे हम नहीं
कितने भी भूत-प्रेत भगाने के
जतन कर लें वो पर
उनके शरीर को छोंड़कर
जाएगे हम नहीं…

Comments

8 responses to “प्यार का इजहार”

  1. वाह वाह, अतिसुन्दर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Satish Pandey

    गजब अंदाज़, हा हा हा, क्या शानदार कल्पना है वाह वाह

  3. Geeta kumari

    हा हा हा प्रज्ञा सौतन की नौबत ही ना आने देना भई ।
    बहुत ही शानदार प्रस्तुति

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