प्यार के चक्कर में
मत लिख सैकड़ों कविता,
ये सब तो पूर्व में
कह कर गए हैं सब वियोगी कवि।
तब भी पसीजा क्या कभी
दिल बेवफाओं का।
कलम मत घिस वियोगों पर
नए योगों की रचना कर।
—- डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत,
प्यार के चक्कर मे
Comments
12 responses to “प्यार के चक्कर मे”
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वाह जबरदस्त बात कह दी
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धन्यवाद जी
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Kamal hai
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Thanks
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Wah
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धन्यवाद जी
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वाह.. वाह… जबरदस्त शत प्रतिशत सत्य बात हैं…
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धन्यवाद जी
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नए योगों की रचना कर
👏👏👏👏👏-
👏
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🙏🙏
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👍
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