प्रज्ञा के सुविचार

खूबसूरती चकाचौंध में नहीं
मन में होती है
इसीलिए कभी कोई
चीज बहुत खूबसूरत लगती है
तो कभी वही चीज बुरी भी लगती है…
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आपने देखा होगा जब भूख ना लगी हो तो
छप्पन भोग भी अच्छा नहीं लगता
पर जब जोर की भूख लगती है तो
कंकड़-पत्थर भी बहुत स्वादिष्ट लगते हैं
स्वाद आने के लिए खाना नहीं
भूख अच्छी होनी चाहिए…

Comments

4 responses to “प्रज्ञा के सुविचार”

  1. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर भाव।

  2. Geeta kumari

    कंकड़, पत्थर?? वाह प्रज्ञा जी अतिशयोक्ति अलंकार की ख़ूब सुंदर प्रस्तुति

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