*प्रभु का उपहार*

प्रभु का उपहार,
है ये ज़िन्दगी
किसी का प्यार,
है ये ज़िन्दगी
कभी जीत तो कभी,
हार है ये ज़िन्दगी
किसी का इन्तजार,
है ये ज़िन्दगी
ना समझना कभी भी,
इसको किसी से कम प्रिय,
कम नहीं है चमत्कार से ये ज़िन्दगी

*****✍️गीता

Comments

8 responses to “*प्रभु का उपहार*”

  1. जिन्दगी जीने के लिए प्रोत्साहित करती गीता जी की पंक्तियां जो जीवन का मूल्य समझाती प्रतीत हो रही हैं

    1. हां प्रज्ञा बिल्कुल सही लिखा है आपने । इस सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद

  2. Satish Pandey

    जिंदगी की खूबसूरती को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत करती कवि गीता जी की बहुत ही सुंदर कविता है यह।
    कभी जीत तो कभी,
    हार है ये ज़िन्दगी
    किसी का इन्तजार,
    है ये ज़िन्दगी
    वाह क्या बात है। कथ्य और शिल्प का बेहतरीन तालमेल।

    1. Geeta kumari

      इस सुन्दर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी
      प्रेरणादायक टिप्पणी हेतु हार्दिक आभार🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

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