12 Comments

  1. स्वर्ण बरसा रही हैं देखो,
    सुबह-सुबह सूरज की किरणें।
    अभी तलक क्यों सो रहे हो,
    उठो सवेरा हो गया है॥
    —— बहुत ही शानदार लेखनी है। अत्यंत निर्मल भाव हैं। वाह वाह

    1. इस उत्साहवर्धक समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, हार्दिक आभार सर

  2. स्वर्ण बरसा रही हैं देखो,
    सुबह-सुबह सूरज की किरणें।…… सुबह का बहुत सुंदर वर्णन और अनुप्रास अलंकार से सजी बहुत लाजवाब कविता

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