प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष

प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष
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हर बालक को एक-सा,
पालन पोषण,शिक्षा परिवेश मिले।
समता,मानवता,बन्धुत्व,करूणा
भरने वाला देश मिले।
क्या बिगाड़ेगा उनका कोई
जहाँ रहीम जौर्ज गणेश मिले।
एक ऐसी धरा का नवनिर्माण करें
जहाँ देश से गले विदेश मिले।
ना चीन हमारी जमी हरपे,
ना पाक से विष रूपी द्वेष मिले।
साम्राज्यवादियो के नापाक इरादे धूल दूषित हो
प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष खिले।
हाँ, एक ऐसी धरा का नवनिर्माण करें
जहाँ देश से गले विदेश मिले।।
सुमन आर्या

Comments

16 responses to “प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष”

  1. Geeta kumari

    सुंदर भावनाएं

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद ।

  2. Suman Kumari

    आभार ज्ञापित ।

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    मानवतावादी विचारों से प्रेरित,सराहनीय रचना
    अगर “करुणा भरने वाला देश मिले” पक्तिं में देश की जगह सन्देश शब्द का इस्तेमाल होता तो और भी बढ़िया तुकबंदी बनती।

    1. बिलकुल सही कहा आपने धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद ।

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद अंजलीजी

  4. Priya Choudhary

    Ye सुंदर कल्पना साकार सिर्फ भारत देश में ही हो सकती है
    सुंदर पंक्तियां👏

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद धन्यवाद ।

  5. Satish Pandey

    कविता के माध्यम से एक आदर्श देश की कल्पना की गयी है जहाँ पर समरसता हो, समानता हो, हम अपने देश भारत में व्यापक जनजागरूकता से यह लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, सुंदर प्रयास

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  6. तद्भव तत्सम शब्दों का सुंदर प्रयोग तथा जनता में जागरूकता लाने वाले सुंदर कविता और एक सुंदर देश बनाने की कवि की कल्पना सराहनीय है भाव पक्ष संवेदनशील है कल आप आज बहुत मजबूत है

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