11 Comments

  1. कहे लेखनी छोड़, चलो सब ऐसी वैसी,
    प्रेम भावना बढ़े, बात कर लो अब ऐसी।
    __________ सब से मिलजुल कर प्रेम भाव से रहने की बहुत सुंदर कविता की सृष्टि हुई है कवि सतीश जी की लेखनी से, छंद शैली में बहुत शानदार रचना और लाजवाब अभिव्यक्ति, अति उत्तम लेखन

Leave a Reply