माना कि मुकद्दर पे जोर चलता नहीं किसी का।
फिर क्यों न मेहनत से ही दोस्ती कर लिया जाए।।
फिर क्यों न…..
Comments
10 responses to “फिर क्यों न…..”
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बहुत सुंदर प्रस्तुति है। मेहनत से दोस्ती हो तो मुकद्दर भी पीछे पीछे आ ही जाता है ।
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समीक्षा के लिए धन्यवाद।
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🤔👌✍👍👍😃
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शुक्रिया।
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वाह, कर्मपथ की ओर प्रेरित करती पंक्तियाँ
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धन्यवाद।
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वाह
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शुक्रिया मैडम।
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सुंदर
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समीक्षा के लिए धन्यवाद।
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