फिर क्यों न…..

माना कि मुकद्दर पे जोर चलता नहीं किसी का।
फिर क्यों न मेहनत से ही दोस्ती कर लिया जाए।।

Comments

10 responses to “फिर क्यों न…..”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर प्रस्तुति है। मेहनत से दोस्ती हो तो मुकद्दर भी पीछे पीछे आ ही जाता है ।

    1. Praduman Amit

      समीक्षा के लिए धन्यवाद।

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया।

  2. Satish Pandey

    वाह, कर्मपथ की ओर प्रेरित करती पंक्तियाँ

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद।

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया मैडम।

    1. Praduman Amit

      समीक्षा के लिए धन्यवाद।

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