बचपन के कुछ दिन

फिर से बचपन में लौटना है आज मुझे
कुछ पल फुर्सत के जीना है आज मुझे
मां की गोद में रखकर सिर सोना है आज मुझे
बहन की चोटी खींच आज फिर दौड़ लगाना है
छिपकर पापा के पीछे से उसे चिड़ाना है।

Comments

11 responses to “बचपन के कुछ दिन”

  1. मार्मिक रचना

  2. Kanchan Dwivedi

    Thanks

    1. Kanchan Dwivedi

      Thanks

    1. Kanchan Dwivedi

      Dhanyawaad

  3. Kanchan Dwivedi

    Shukriya

    1. Kanchan Dwivedi

      Dhanyawaad

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