बचपन

जीवन की अवस्था तीन सही बचपन का कोई जवाब नहीं
आनंद भरा रहता तन मन पुलकित होता हरेक का संग
शिशु मुख लगता प्यारा प्यारा हर अंग भाता न्यारा न्यारा
मुस्कान हो या फिर हो क्रंदन पलक लपकता रहता ही छवि
जीवन की अवस्था कई सही बचपन का कोई जवाब नहीं
हर नयन में शिशु का आकर्षण न्योछावर हो जाता जन मन
नन्ही बांहो में मां समा जाती पूर्णता का अहसास करा पाती
अपनेपन का कोई स्वार्थ नहीं हर जीव से रहता लगाव तभी
जीवन की अवस्था कई सही बचपन का कोई जवाब नहीं
तब फिर हरी भरी जवानी आती सुख की सौ नयी सौगाते लाती
नव शक्ति से भरता है शरीर चाहता हरण न पर की पीर
सामर्थ्यवान रहते हुए भी तन आलस से भरा रहता ये जभी
जीवन की अवस्था कई सही बचपन का कोई जवाब नहीं
निज पर की आशा बढ़ जाती स्वयंभू क्यों स्वयं को भटकाती
नित नूतनता का आभास लिए कुछ कर जाने का विश्वास पिए
यौवन की सुगंध और मादकता कई प्यासों की आस जिलाती रही
जीवन की अवस्था कई सही बचपन का कोई जवाब नहीं
फिर ज्ञान का दीप जलाता अनचाहा निश्चित बुढ़ापा आता
अनुभव धन का भंडार भरे चहुओर फैलाने को शिथिल परे
परन्तु ये कड़वा सच की इससे यौवन न किसी का ललचाये कहीं
जीवन की अवस्था कई सही बचपन का कोई जवाब नहीं
परशुराम सा हो नर का जीवन संस्कार बाँटना चाहे बुझा यौवन
श्रम का महत्व ही है जग में इसी से ही सुधरता शिक्षित मन
सद्गुरु मिले अगर कोई सच्चा जीवन सफल बनता है तभी
जीवन की अवस्था कई सही बचपन का कोई जवाब नहीं

Comments

10 responses to “बचपन”

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      धन्यवाद

  1. Geeta kumari

    बचपन की महत्ता को दर्शाती हुई बेहद शानदार रचना

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      हार्दिक आभार

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      धन्यवाद

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      आपकी दया से

  3. Praduman Amit

    Very nice

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      धन्यवाद

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