बड़ी अजीब है ये घुँघरू।
बन्धे जब दुल्हन के पैरों में
बड़े खुशनसीब है ये घुँघरू।।
झनकती जब ये कोठों पर
बड़े हीं गरीब हैं ये घुँघरू ।
बांध के किन्नर भी नाचे
पर बदनसीब है घुँघरू।।
पीतल के हो या हो चांदी के
कला के नींब है ये घुँघरू।
विनयचंद साहित्य सरगम के
सदा करीब है ये घुँघरू।।
बड़ी अजीब है ये घुँघरू
Comments
7 responses to “बड़ी अजीब है ये घुँघरू”
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घुंघरू के बारे में बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति है, शास्त्री जी
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धन्यवाद
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वाह, श्रेष्ठ रचना
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धन्यवाद
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क्या बात है बहुत खूब
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