बना मेहंदी सजाया था तेरे हाथों को

अभी कल की ही तो बात लगती है

अरमानो में घोल इश्क का रंग मैंने

बना मेहंदी सजाया था तेरे हाथों को

सब बदल गया कुछ ही बरसों में

सब रंग अरमानो के हुए बैरंग

ज़िन्दगी जुदा कर गई तेरे हाथों को

 

                 …… यूई

Comments

2 responses to “बना मेहंदी सजाया था तेरे हाथों को”

  1. उच्चकोटि की रचना है आपकी।।

Leave a Reply

New Report

Close