टन- टन टन- टन करते वो
फेरीवाला आता था।
गदा के जैसे डब्बा अपने
काँधे पर ले आता था।।
सिर पे टोपी गले में गमछा
नाक पे ऐनक बड भाता था।
बम्बई मिठाय,,लड़का सब खाय
बूढ़ा ललाय गाते गाते आता था।।
खड़ा हो गया घर के आगे
हम बच्चों की टोली आई।
आजा बाबू पास हमारे
लेकर आया बम्बई मिठाई।।
दस पैसे में माला ले लो
घड़ी मिलेगी चार आने में।
मात्र अठन्नी काफी है एक
मोटरसाइकिल बन जाने में।।
पूरा रुपया लेकर आओ
तुम्हें दिखाएँ हवाई जहाज।
खाया खेला मौज मनाया
क्या था बचपन क्या है आज।।
बम्बई मिठाई वाला
Comments
One response to “बम्बई मिठाई वाला”
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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