11 Comments

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, इस सुंदर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार

  1. देखो ये बादल बिना फ़िकर
    उड़ते फिरते इधर-उधर।
    कभी-कभी करते शैतानी,
    छम-छम खूब बरसाते पानी।
    सूख रही थी मेरी बगिया,
    जल बरसाने आए मेघा।
    बहुत ही सुंदर कविता

Leave a Reply