सर्द पवन का झोंका लेकर,
आई ये बरसात है।
बे मौसम ही आई लेकिन,
कुछ तो इसमें बात है।
भीगे सारे बाग-बगीचे,
भीगे पुष्प और पात हैं।
भीग गया है तन-मन सारा,
भीग गये जज़्बात हैं॥
_____✍गीता
बरसात
Comments
2 responses to “बरसात”
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वाह, बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ हैं।
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बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी
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