बस यादों में रह जाते हैं

जाने कहाँ विलीन
हो जाते हैं,
कल तक जो बोलते थे,
मुस्कुराते थे
अपनी भावना को व्यक्त
करते थे वे,
जाने क्यों माटी हो जाते हैं।
शून्य हो जाते हैं।
न कोई अहसास
न कोई वेदना,
बस निर्जीव हो जाते हैं।
पंचतत्व में मिल जाते हैं,
धुंए में उड़ जाते हैं,
जल में मिल जाते हैं
बस यादों में रह जाते हैं।
जाने कहाँ चले जाते हैं।

Comments

10 responses to “बस यादों में रह जाते हैं”

  1. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर रचना प्रस्तुत किया है आपने। आपको मेरी ओर से बहुत धन्यवाद।

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. बहुत ही खूबसूरत कविता लिखी है आपने सर

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  3. अत्यंत गहरी कविता

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  4. Geeta kumari

    इस दुनियां से जाने के बाद आए जब अपनों की याद तो यही एहसास होता है ।बहुत ही संजीदा रचना

    1. Satish Pandey

      सुन्दर समीक्षा हेतु सादर आभार

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत बधाई

Leave a Reply

New Report

Close