बहार बन कर तुम जिन्दगी में

बहार बन कर तुम जिन्दगी में
आये हो जब से बहारें खिली हैं।
अकेले अकेले तन्हा सफर था
आपसे ख़ुशी की फुहारें मिली हैं।

Comments

12 responses to “बहार बन कर तुम जिन्दगी में”

    1. बहुत धन्यवाद

  1. बहुत अच्छी पंक्तियाँ

    1. सादर धन्यवाद

  2. वाह बाहर बनकर

    1. बहुत सारा धन्यवाद

  3. Geeta kumari

    Sir,You express your feelings very beautifully…..
    Very nice…

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, आपकी समीक्षा उत्साहवर्धक है। सादर आभार

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

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