बहार बन कर तुम जिन्दगी में
आये हो जब से बहारें खिली हैं।
अकेले अकेले तन्हा सफर था
आपसे ख़ुशी की फुहारें मिली हैं।
बहार बन कर तुम जिन्दगी में
Comments
12 responses to “बहार बन कर तुम जिन्दगी में”
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Very nice poem
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बहुत धन्यवाद
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बहुत अच्छी पंक्तियाँ
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सादर धन्यवाद
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वाह बाहर बनकर
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बहुत सारा धन्यवाद
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Sir,You express your feelings very beautifully…..
Very nice…-
बहुत बहुत धन्यवाद, आपकी समीक्षा उत्साहवर्धक है। सादर आभार
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बहुत खूब
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Thank you
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अतिसुंदर
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सादर धन्यवाद जी
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