बहुत दूर

चलते-चलते बहुत दूर निकल आई हूँ मैं,
बहुत कुछ पीछे छोड़ आयी हूँ मैं,
वो खुशियाँ, वो सपने,
वो मस्ती के पल अपने…
कुछ आँसू, कुछ यादें,
कुछ लोगों से की बातें…..
बस… छोड़ आयी हूँ मैं,
बहुत दूर निकल आयी हूँ मैं।
बहुत दूर…..

चलते-चलते कभी याद आते हैं वो पल,
जिन्हें जिया था मैंने कल।
तो सोचती हूँ कि क्यों???
खो गई वो हँसी कहीं,
खो गई वो मस्ती कहीं।
काश! मिल जाये फिर से मुझे वो पल कहीं…
पर… फिर याद आता है मुझे,
कि सब कुछ छोड़ आयी हूँ मैं,
बहुत दूर निकल आयी हूँ मैं।
बहुत दूर…..

Comments

3 responses to “बहुत दूर”

  1. Vinod Sharma Avatar
    Vinod Sharma

    Nice

    1. Anushree Bhardwaj Avatar
      Anushree Bhardwaj

      Thnx a lot

  2. Abhishek kumar

    Good

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