बहुत वक्त से तू मेरी ओर बढ़ रही थी

बहुत वक्त से तू मेरी ओर बढ़ रही थी,
आ चूम कर तेरे पैरों को तेरी थकान उतार दूँ।।
राही (अंजाना)

Comments

2 responses to “बहुत वक्त से तू मेरी ओर बढ़ रही थी”

  1. राम नरेशपुरवाला

    सुन्दर

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