बिछुड़े दिलों में उनके

रात हो गई है
बात हो गई है
वर्षों से जिन में काफी
दूरी बनी हुयी थी
बिछुड़े दिलों में उनके
मुलाक़ात हो गई है।
दिन भर रही थी गर्मी
उमस भरी हुई थी
फिर शाम होते होते
बरसात हो गई है।
रस्साकशी चली थी
आरोप मढ़ रहे थे
छोटी बात पर वे
नफरत उगल रहे थे
पर प्यार भी था उनमें
नफरत से लड़ रहा था,
संघर्ष में, शाह-मात में
यह बात हो गयी है
शह प्यार की व
नफरत की मात हो गई है।
बिछुड़े दिलों में उनके
मुलाक़ात हो गई है।

Comments

10 responses to “बिछुड़े दिलों में उनके”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. सादर धन्यवाद

    1. धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thanks

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  2. MS Lohaghat

    waah waah

  3. Satish Pandey

    सादर धन्यवाद

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