बीती बातों को याद कर,
मत कुरेदना अपने घावों को।
ह्रदय में ही रहने देना,
अपने हृदय के भावों को ।
मरहम नहीं लगाती दुनियाँ,
मरहम की मत करना आस।
केवल ज़ख्म देखना चाहती है,
नहीं करे दर्द का एहसास॥
______✍गीता
बीती बातें
Comments
2 responses to “बीती बातें”
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बहुत सुंदर लेखन, अति उत्तम सृजन
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बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी
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