12 Comments

  1. अब बारी है कुछ परंपराओं को बदलने की गजब दास्तां है बुढ़ापे की लाचारी की 🙏🙏 बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति सुमन जी

  2. आज कयी बच्चों के एक पिता को
    दवा के अभाव में तङपते देखा है
    ना उसके भूख की चिन्ता
    न परवाह उसकी बीमारी की
    गज़ब दास्तां है, बुढ़ापे की लाचारी की।
    _________ बुढ़ापे की स्थिति का बहुत ही मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है सुमन जी अपने, हृदय स्पर्शी रचना

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