3 Comments

  1. “कुछ के पास अपार संपदा पड़ी हुई है,
    कुछ की निर्धनता अपने में ही अड़ी हुई है।”
    कवि सतीश जी की बहुत ही सच्ची पंक्तियां है कवि ने समाज का पूर्ण रूप से अवलोकन कर के है ये पंक्तियां लिखी हैं, भारत देश में तो ऐसा ही हो रहा है,धन का असमान वितरण ही यह स्थिति बनाए हुए है।
    बहुत खूब बहुत सुंदर कविता, उत्कृष्ट लेखन

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