7 Comments

  1. क्या बात है
    कितना सुन्दर वर्णन किया है
    तथा अति संवेदनशील बात कही है आपने
    कि बेटियाँ किस घर की होती हैं

  2. बेटियां दोनो घरों की होती हैं….
    “दिवाली के हर दीप में मुस्कुराती है बेटियां,
    होली के हर रंग में खिलखिलाती है बेटियां….
    ये दर्द और खुशी वो क्या जानें,
    जिनके घरों में नहीं होती हैं बेटियां’।

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