बेटी घर की रौनक होती है
बाप के दिल की खनक होती है
माँ के अरमानों की महक होती है
फिर भी उसको नकारा जाता है
भेदभाव का पुतला उसे बनाया जाता है
आओ इस रीत को बदलते है
एक बार फिर उसका स्वागत करते है
बेटी घर की रौनक होती है
Comments
14 responses to “बेटी घर की रौनक होती है”
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Wah
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Shukriya
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बहुत सुन्दर पंक्तिया है।
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Shukriya
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सुंदर रचना
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Shukriya
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वाह बहुत सुंदर
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वाह
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Good
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Nice
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वाह
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👏👏
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वाह वाह
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क्या बात है बिल्कुल सही कहा आपने बेटी घर की रौनक होती है
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