बे-लौस

‘बे-लौस किस ज़ुबाँ से कहें आज बशर को,
साये में बैठकर भी काट डाला शजर को..’

– प्रयाग

मायने :
बे-लौस – नि:स्वार्थ
बशर – इंसान
शजर – पेड़

Comments

8 responses to “बे-लौस”

    1. शुक्रिया जी

  1. बहुत खूब, बहुत शानदार

    1. बहुत शुक्रिया आपका

    1. धन्यवाद जी

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