बढ़ता है बढ़ जाने दो
दूजे से चिढ़ना छोडो
जो बढ़ता है बढ़ जाने दो जी,
आप चलो अपनी राहों में
औरों को भी चलने दो जी,
अपनी मेहनत से तुम पाओ
औरों को भी पाने दो जी ,
टांग फंसाना उचित नहीं है
सबको जीवन जीने दो जी,
आप चढ़ो ऊँची चोटी में
जितना भी चढ़ सकते हो,
दूजे को गड्ढे में डालो
यह सब अब रहने दो जी।
—— Dr. Satish Pandey
बहुत सुंदर
Dhanyvaad ji
अतिसुंदर
Dhanyvad ji
छोड़ो