रात भर के अंधेरे को
जिस तरह सूर्य ने आकर ,
भगाया एक ही क्षण में,
उस तरह आस का सूरज
उगाओ आप भी मन में।
भगाओ दूर चिंता को
नजर रख लक्ष्य पर अपनी
बढ़ो, पीछे न देखो तुम
सफलता होगी चरणों में।
अंधेरा मिट गया समझो
उजाला हो गया देखो,
उठो जागो बढ़ो आगे
सवेरा हो गया देखो।
भगाओ दूर चिंता को
Comments
8 responses to “भगाओ दूर चिंता को”
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धन्यवाद जी
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सुंदर भाव
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बहुत बहुत आभार
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Atisunder kavita
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अतिसुन्दर
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Good
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thanks
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