8 Comments

  1. “रोशनी में चमकता कांच नहीं अंधेरे में जले, आप वो चिराग बनो”
    केवल चमक ही नहीं,अपितु चमक ऐसी हो जो दूसरे के जीवन में उजाला दे सके ,यही संदेश देती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर और प्रेरक रचना

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