आज की सच्ची घटना पर आधारित हिंदी कविता
शीर्षक :- भरोसा
आज मेरी क्यारी में बैठा परिंदा
मुझे देख छुप गया
मैं रोज़ उसको दाना डालता हूँ
फिर भी वो डरा सहमा
अपने पंखो के भीतर छुप गया
जैसे बचपन में हम आँखों पे
हथेली रख छुप जाया करते थे
वैसे ही भोलेपन से वो भी
मुझसे छुप गया
उसने सोचा के मैंने जाना नहीं
के वो वहाँ बैठा हुआ है
मैं भी चुपके से पानी रख
वहाँ से निकल गया
उसके भोलेपन पर मुस्कुराया भी
और थोडा रोना आया भी
फिर समझा के वो क्यों सहम गया
हम जितना चाहे पुण्य कमा ले
दाना डाल के उनको अब,
उनका भरोसा हम मानवों से
उठ गया
वो मुझे देख सहमा था इतना
के अपने उड़ने का हुनर
भी भूल गया
आज मेरी क्यारी में बैठा परिंदा
मुझे देख छुप गया
अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”
सारांश -: दोस्तों ये घटना आज सुबह की है , जो कि मेरी दैनिक दिनचर्या है कि मैं रोज़ सुबह उठते ही परिंदों को दाना डालती हूँ तब अपने दिन की शुरुआत करती हूँ , पर आज इस घटना ने मुझे एक कविता की सोच दी जो मैं आप लोगों से साँझा कर रही हूँ l भरोसा ऐसी चीज़ है जो एक बार टूट जाये तो फिर होता नहीं , चाहे वो मानव का मानव पे हो या परिंदों अथवा पशुवों का मानव पर l ये कविता हम सब की मानसिकता और भावनाओं को झकझोरती है, के हमने इंसानियत के बजाय इन पक्षी पशुओं को क्या दिया??
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