भागीरथी..

पापनाशक भागीरथी
को इन्सान ने मैला कर दिया।
राम तेरी गंगा मैली’ को
हमने कड़ी मेहनत से
चरितार्थ कर दिया।
धो रही थी अब तक जो
हमारे पाप को
अपने पुनीत कर्मों से
हमनें उसकी पवित्रता को धो दिया।
बहाकर मैल नालियों, नदियों का
हमनें देख तो
ओ राम !
हमनें अब तेरी गंगा को मैली
कर दिया।

Comments

17 responses to “भागीरथी..”

  1. This comment is currently unavailable

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

  3. Geeta kumari

    Nice lines

  4. Priya Choudhary

    Bhut sunder

  5. Rishi Kumar

    बहुत अच्छा

  6. Pratima chaudhary

    बहुत बढ़िया विचार

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