5 Comments

  1. होली के त्योहार की पौराणिक कथा को आपने कविता में
    पिरोया है बहुत ही सराहनीय है..
    कलापक्ष और भावपक्ष दोनो सबल हैं…
    आपकी लेखनी शानदार चलती है

  2. होलिका दहन की बात बताती रचना
    सच की जीत हुई और बुराई की हार हुई
    यही होली मनाने की मंशा है
    होलिका बुआ का दहन और प्रहलाद का बाल भी बांका ना हुआ
    यही बताती है आपकी कविता

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