6 Comments

  1. निधन सदा से देह की होती
    आत्मा नहीं कभी मरती है।
    मरकर भी महामानव की
    सुकृति सदा अमर रहती है।।
    भारत रत्न राजेन्द्र प्रसाद जी को समर्पित बहुत ही बेहतरीन कविता। कवित्वमय वाणी को अभिवादन। कविता में गुरुत्व है, प्रबलता है। बहुत खूब

Leave a Reply