भावनाओं के भवसागर में

सर्वस्व न्योछावर
कर दिया तुझ पर
मोती, माणिक्य
पन्ना, हीरा
हृदय की विक्षिप्त भावनाएं,
क्रूर सम दृष्टियों से
दृष्टिपात करके
यौवन की प्रथम वर्षगांठ पर
हृदय हीन किया तूने•••

हृदयगति हुई मद्धम
स्वांस की ऊर्जावान
गतियों में,
तप्त हुए जाते हैं
वेग के व्याकरण
भावनाओं के भवसागर में
डूबे जाते हैं हम
पार हुए जाते हैं…

Comments

4 responses to “भावनाओं के भवसागर में”

  1. अतिसुंदर रचना 

    1. धन्यवाद 

    1. धन्यवाद 

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