भावना को लिया ढक

गरम हवा है
जल रहे हैं आज भीतर तक,
देख लो छूकर अगर
है कोई आपको शक।
वसन से आज हमने
भावना को लिया ढक,
सोच कर खुद की हालत
बढ़ गई दिल की धक-धक।
गा रहे हैं ये कविता
खुशी में और गम में,
तू भी आकर ओ राही,
स्वाद इसका जरा चख।

Comments

3 responses to “भावना को लिया ढक”

  1. हृदय की भावनाओं को व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी की अति सुन्दर रचना, अत्युत्तम लेखन

  2. Praduman Amit

    आपकी कविता बहुत ही आकर्षित साबित हुई।

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