बाहर विषाद है
भीतर शमशाद है ।
अंतर्मुखी हो जाओ आली
फिर देखो प्रसाद हीं प्रसाद है।।
भीतर शमशाद है
Comments
8 responses to “भीतर शमशाद है”
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👌👌👌👏👏
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वाह, भाई जी बहुत सुंदर
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वाह वाह, अंतर्मुखी होना ही संतोष देता है। बहुत खूब शास्त्री जी आप ग्रेट हैं।
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👌✍✍✍🙏
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Sach hain. Khoob likha
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सुन्दर
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वाह
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