भीतर शमशाद है

बाहर विषाद है
भीतर शमशाद है ।
अंतर्मुखी हो जाओ आली
फिर देखो प्रसाद हीं प्रसाद है।।

Comments

8 responses to “भीतर शमशाद है”

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  2. Geeta kumari

    वाह, भाई जी बहुत सुंदर

  3. वाह वाह, अंतर्मुखी होना ही संतोष देता है। बहुत खूब शास्त्री जी आप ग्रेट हैं।

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