भीड़ में जब कभी तुम

भीड़ में जब कभी तुम
खुद को तन्हा पाओगे,
तब हमें याद करना,
दिल में हमें पाओगे।
प्यार हो , इस तरह से
छोड़ कर न जाओ तुम
प्यार हम से अधिक
दूजे से नहीं पाओगे ।
वो मुलाकात जो
पहली थी उसे याद करो,
वे हंसी पल थे उन्हें
कैसे भुला पाओगे।

Comments

10 responses to “भीड़ में जब कभी तुम”

  1. MS Lohaghat

    वाह बहुत ही अच्छी पंक्ति

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    सुंदर रचना

    1. सादर आभार

  3. सुन्दर रचना

    1. धन्यवाद जी

  4. वाह वाह क्या बात है

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद ji

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