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  1. अज्ञानी अनाड़ी तोहके हम हरदम पुकारेली |
    सुनर गोर रूपवा माई हम एकटक निहारेली |
    बल बुद्धि देतु माई करा हमरो उद्धार |
    झन झंकार बाजे माई तोर वीनवा के तार |
    —— वाह लोक भाषा में मां सरस्वती की वंदना करते हुए कवि श्री श्याम कुंवर भारती जी ने काव्य की अनुपम छटा बिखेरी है। बहुत खूब।

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