मंज़र..

ये कैसी राइड है,
ना कर रहा कोई गाइड है
लंबी – लंबी सी राहें हैं,
मानो प्रियतम की बाहें हैं
नदिया भी बह रही है,
हमसे ये कह रही है
आना फिर दोबारा यहां,
ऐसा मंजर होगा कहां
पवन सुनाती है सरगम,
खुशियां ही खुशियां दिखें यहां
मिट जाते हैं सारे ही गम …

*****✍️गीता

Comments

5 responses to “मंज़र..”

  1. Geeta kumari

    राइड , अंग्रेजी में है__Ride

    1. Thanks for your valuable compliment pragya.

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

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