मंजिल मिल गई

हम उन पर शेर लिखते गए
हमज़ेली भी दीवानी होती गई।
ख्वाबों के सिलसिला ऐसी चली
ज़िन्दगी की नई मंजिल मिल गई।।

Comments

3 responses to “मंजिल मिल गई”

  1. बहुत खूब

    1. Praduman Amit

      स्वागतम।

  2. वाह क्या बात है 

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