4 Comments

  1. धीमी-धीमी धूप संग में,
    मीठी-मीठी खुशियां लाई।
    तिल, गज्जक की खुशबू लेकर,
    सर्दी में संक्रान्ति आई।
    — मकर सक्रांति पर कवि गीता जी की बहुत सुंदर और बेहतरीन रचना है यह। बहुत खूब।

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