आप खो गए थे
मन उद्वेलित था
अब आ गए हो
है प्रफुल्लित सा।
नभ में सूरज उदित सा,
मन है मुदित सा।
आपका होना
रात को चाँद सा,
काजल लगी आंख सा।
मगर प्रविष्टि है कठिन दिल में
क्योंकि वो बना है
शेर की माँद सा।
मगर है चाँद सा।
मगर है चाँद सा
Comments
12 responses to “मगर है चाँद सा”
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बहुत सुन्दर रचना
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बहुत धन्यवाद
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आपका होना रात को चाँद सा,
काजल लगी आंख सा।मगर प्रविष्टि है कठिन दिल में
क्योंकि वो बना है शेर की माँद सा।
मगर है चाँद सा।
________ कविता की नायिका के सुन्दर हृदय की प्रशंसा करती हुई सुन्दर शिल्प और भाव सहित कवि सतीश जी की बहुत सुंदर कविता-
इस बेहतरीन समीक्षा हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत शानदार
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बहुत धन्यवाद
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बहुत ही सुन्दर
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बहुत धन्यवाद
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bahut khoob
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Thanks sir
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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