मगर है चाँद सा

आप खो गए थे
मन उद्वेलित था
अब आ गए हो
है प्रफुल्लित सा।
नभ में सूरज उदित सा,
मन है मुदित सा।
आपका होना
रात को चाँद सा,
काजल लगी आंख सा।
मगर प्रविष्टि है कठिन दिल में
क्योंकि वो बना है
शेर की माँद सा।
मगर है चाँद सा।

Comments

12 responses to “मगर है चाँद सा”

  1. बहुत सुन्दर रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    आपका होना रात को चाँद सा,
    काजल लगी आंख सा।मगर प्रविष्टि है कठिन दिल में
    क्योंकि वो बना है शेर की माँद सा।
    मगर है चाँद सा।
    ________ कविता की नायिका के सुन्दर हृदय की प्रशंसा करती हुई सुन्दर शिल्प और भाव सहित कवि सतीश जी की बहुत सुंदर कविता

    1. Satish Pandey

      इस बेहतरीन समीक्षा हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद

  3. बहुत शानदार

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  4. बहुत ही सुन्दर

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      Thanks sir

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

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