मन अगर साफ है

मन अगर साफ है
सभी कुछ साफ है
अगर है मैल मन में
दिखावा पाप है।
वार आगे न करके
करे जो पीठ पर,
उसे मत वीर कहना
समझ जाना समय पर।
रखे जो ख्याल दूजे का
सहारा बेसहारे को
उसे कहते फरिश्ता सब
उसे सच में समझना रब।

Comments

5 responses to “मन अगर साफ है”

  1. बहुत सुन्दर रचना है सर, वाह

  2. उम्दा प्रस्तुति

  3. Geeta kumari

    “करे जो पीठ पर, उसे मत वीर कहना…सहारा बेसहारे को
    उसे कहते फरिश्ता सब”
    इस कविता के माध्यम से बहुत ही गहरी बात कही है कवि, सतीश जी ने, पीठ पीछे वार वाले को कदापि वीर नहीं कहा जा सकता। जो मुश्किल वक्त में सहारा दे वही सच्चा इंसान फरिश्ता कहने लायक होता है, अति उत्तम भाव लिए हुए बहुत ही उत्कृष्ट रचना

  4. अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना शतप्रतिशत यथार्थ

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