मन के घाव भी भरने जरूरी हैं
तेरे-मेरे नैन भी मिलने जरूरी हैं
आकाश से धरती के जो हैं फासले तय हैं
बरस कर बूंद तुझमें ऐ जमीं !
मिलना जरूरी है…
मन के घाव
Comments
5 responses to “मन के घाव”
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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