मन को छोटा न कर
दुःख दर्द तो मेहमान हैं,
आते हैं जाते हैं
ये गम स्थाई नहीं हैं
ये मेहमान हैं।।
न घबरा दुःखों से
ये तेरी परीक्षाएं हैं,
ये तो तेरे कार्य की
समीक्षाएँ हैं।
मन को छोटा न कर
Comments
10 responses to “मन को छोटा न कर”
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धन्यवाद जी
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शास्त्री जी को समर्पित पंक्तियां!
बहुत ही प्रेरणादायक सतीश सर 🙏🙏-
सादर धन्यवाद जी
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Nice
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सादर धन्यवाद नेहा जी
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आदरणीय ‘विनय चंद,’ शास्त्री जी द्वारा प्रस्तुत मार्मिक कविताओं को पढ़कर जो मन में भाव प्रकट हुए उससे ये बोल उपजे हैं, ये पंक्तियां आदरणीय शास्त्री जी के उत्साहवर्धन हेतु सृजित हैं, आप लोगों को पसंद आई हार्दिक धन्यवाद।
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Nice lines
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वाह वाह
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thanks
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