मन को छोटा न कर

मन को छोटा न कर
दुःख दर्द तो मेहमान हैं,
आते हैं जाते हैं
ये गम स्थाई नहीं हैं
ये मेहमान हैं।।
न घबरा दुःखों से
ये तेरी परीक्षाएं हैं,
ये तो तेरे कार्य की
समीक्षाएँ हैं।

Comments

10 responses to “मन को छोटा न कर”

  1. This comment is currently unavailable

    1. धन्यवाद जी

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    शास्त्री जी को समर्पित पंक्तियां!
    बहुत ही प्रेरणादायक सतीश सर 🙏🙏

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद नेहा जी

  3. Satish Pandey

    आदरणीय ‘विनय चंद,’ शास्त्री जी द्वारा प्रस्तुत मार्मिक कविताओं को पढ़कर जो मन में भाव प्रकट हुए उससे ये बोल उपजे हैं, ये पंक्तियां आदरणीय शास्त्री जी के उत्साहवर्धन हेतु सृजित हैं, आप लोगों को पसंद आई हार्दिक धन्यवाद।

  4. Geeta kumari

    Nice lines

  5. Kumar Piyush

    वाह वाह

    1. Satish Pandey

      thanks

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