मुझे अपना बनाने में
इस कदर देर मत तू,
न जाने मन मेरा चंचल
किसी से और जुड़ जाये।
मुझे बस लाभ दिखता है
इसलिए देर मत कर अब
न जाने कब पलट जाऊं
न जाने कब मुकर जाऊं।
मन चंचल
Comments
11 responses to “मन चंचल”
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Gajab ho
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Thank you
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Swagat yogy
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धन्यवाद जी
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nice
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सादर धन्यवाद
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Nice
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Dhanyawad ji
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👏
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👏
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🙏
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