कौन सुनाए गीत
मुझे मन भाए बहुत संगीत।
गुन गुन करते भँवरे ने बोला
चूँ चूँ करती चिड़िया ने चहका,
मन के भीतर पुष्प सा महका,
जब आया मेरा मीत,
मुझे मन भाये बहुत संगीत
सुना दे सुर देकर दो गीत
न रह यूँ चुप मेरे ओ मीत
सुना दे कोई भी संगीत।
मन भाये बहुत संगीत
Comments
7 responses to “मन भाये बहुत संगीत”
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अति उत्तम रचना है वाह
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वाह बहुत खूब
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वाह अति उत्तम
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बहुत सुंदर
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कौन सुनाए गीत
मुझे मन भाए बहुत संगीत।
************कवि हृदय को संगीत पसंद होना तो लाज़मी है,बहुत शानदार और मीठी रचना,बहुत खूब । लाजवाब प्रस्तुति -
अतिसुंदर
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कौन सुनाए गीत
मुझे मन भाए बहुत संगीत।
गुन गुन करते भँवरे ने बोला
चूँ चूँ करती चिड़िया ने चहका,
मन के भीतर पुष्प सा महका,
जब आया मेरा मीत,
मुझे मन भाये बहुत संगीत
सुना दे सुर देकर दो गीत…
बहुत सुंदर वा संगीतमय लेखन
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