ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे।
निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।।
श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे।
निश-दिन मूषक मरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै
ममता
Comments
6 responses to “ममता”
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शब्दों के जाल अति उत्तम है।
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धन्यवाद वीर
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वाह बहुत खूब, अति उत्तम
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धन्यवाद
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अति सुंदर
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धन्यवाद
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