जिस महफ़िल में कोई जानता ना हो,
उस महफ़िल में जाना क्यूं है
जिस महफ़िल में,अनसुना कर दें तुझे
उस महफ़िल में, कुछ सुनाना क्यूं है
मुखौटे लगा कर बैठे हैं लोग जहां,
वहां तुझे भी मुखौटा लगाना क्यूं है
झूठ से ही .गर ख़ुश हैं कुछ लोग,
“गीता” तुझे सच बताना क्यूं है
महफ़िल
Comments
17 responses to “महफ़िल”
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Wah
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बहुत बहुत धन्यवाद
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nice
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धन्यवाद
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मुखौटे लगा कर बैठे हैं लोग जहां,
वहां तुझे भी मुखौटा लगाना क्यूं है
nice lines-
बहुत बहुत धन्यवाद
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nice
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Thanks
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बहुत खूब
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धन्यवाद🙏
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महफिल में कोई जाता ना हो। जानता??
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद🙏
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वाह जी वाह
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धन्यवाद🙏
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जी
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वाह
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