तेरी खुशी के लिए
मंदीर-मस्जिद भटका हूँ।
तेरी तन्हाई में
पल-पल तड़पा हूँ।
तु मिल तो सही एक बार
इस पागल दिवाने से।
तेरे एक मुलाकात को
जन्मों-जन्मों का तरशा हूँ।
महबुबा
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11 responses to “महबुबा”
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